मत्स्य पालकों के लिए बेहद काम की है यह तकनीक, अब पानी की कर सकेंगे ऑनलाइन मॉनिटरिंग

मत्स्य पालकों के लिए बेहद  काम की है यह तकनीक, अब पानी की कर सकेंगे ऑनलाइन मॉनिटरिंग



 मछली पालन में झारखंड देश का अग्रणी राज्य बन रहा है. चारों तरफ से जमीन से घिरे होने के बावजूद मत्स्य पालन में झारखंड में वृद्धि होना राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. इसके पीछे यहां के किसानों की मेहनत छिपी हुई है. यहां के किसान अब उन्नत तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे उत्पादन बढ़ा है.

मत्स्य पालक यह जानते हैं कि मछली पालन के लिए सबसे जरूरी चीज पानी होती है. ऐसे में पानी की गुणवत्ता बनाये रखना और समय समय पर इसका ध्यान देना बेहद जरूरी हो जाता है. इसे लेकर ही आज ऐसी तकनीक की चर्चा इस खबर में होगी जिसमें मत्स्य पालकों को अपने फोन में ही एप के जरिये पानी से संबंधित पूरी जानकारी हासिल हो जाएगी. इसके जरिये मत्स्य पालक यह पता लगा पाएंगे की उनके तालाब या जलाशय के पानी में ऑक्सीजन का लेवल कितना या फिर किन पोषक तत्वों की जरूरत पानी में  है. इसके आधार पर वो तुंरत इस पर समस्या को दूर कर देते हैं जिससे उनका उत्पान बढ़ जाता है.

क्या है तकनीक

इस तकनीक का नाम आइओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) है. इसके जरिये मछली पालन किये जानेवाले तालाबों में उपलब्ध रसायन, ऑक्सीजन लेवल और खरपतवार की जानकारी ऑनलाइन हासिल की जा सकेगी. इसके लिए तालाब में इस तकनीक का इस्तेमाल करना होगा. झारखंड में इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए  पहले चरण में राजधानी के दो तालाब सहित अन्य जिलों के तालाबों में इस तकनीक का उपयोग किया जाएगा. किसानों तक इस तकनीक को पहुंचाने के लिए और उन्हें इस तकनीक की विस्तृत जानकारी देने के लिए एजेंसी का चयन किया जाएगा.


चिप आधारित है यह तकनीक

आइओटी एक चिप आधारित तकनीक है. यह चिप पर काम करती है. जिस तालाब या जलाशय में किसान मछली पालन करते हैं उसकी जानकारी हासिल करने के लिए चिप को पानी के अंदर डालना होगा.यह पूरी तरह इंटरनेट से संचालित होगा.एप के जरिये चिप की जानकारी सीधे किसान के मोबाइल पर मिलेगी. इसके जरिये पानी के अंदर उपलब्ध पीएच, सल्फर, ऑक्सीजन लेवल और अन्य रसायन की जानकारी मोबाइल पर मिलती रहेगी. साथ ही यह भी जानकारी मिलती रहेगी की मछली को कितने ऑक्सीजन की जरूरत है.


इस तरह से एप के जरिये मिलेगा संकेत

आइओटी तकनीक में तालाब में ऑक्सीजन की कमी होते ही लाल रंग का संकेत मिलेगा, जिससे यह पता चलेगा की ऑक्सीजन की कमी हो गयी है. इसके बाद सिर्फ एक कमांड पर मोटर चला दिया जाएगा जिससे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाएगी. जब पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीन हो जाएगा तो मोटर ऑटोमेटिक बंद हो जाएगा. एक आइओटी से दो एकड़ के तालाब पर नजर रखी जा सकेगी. इसका एक यूनिट खरीदने पर लगभग 65 हजार रुपए का खर्च आता है. झारखंड के कुल 34 तालाबों में इसे लगाया जाना है. इसके लिए 24 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है.


दूर होगी मैन पावर की कमी

रांची जिला मत्स्य पदाधिकारी अरुप कुमार चौधरी ने बताया कि इस तकनीक के इस्तेमाल से तालाबों में मैन पावर की कमी को दूर किया जाएगा. अब अपने घर में बैठे मत्स्य पालक पानी से संबंधित जानकारी हासिल कर पाएंगे. साथ ही ऑक्सीजन की कमी से मछलियों को होनेवाले नुकसान को कम किया जा सकेगा.


मॉडल सफल रहा तो विस्तार किया जाएगा

मत्स्य निदेशक डॉ एच एन द्विवेदी ने बताया कि विभाग मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने के लिए नयी तकनीक पर काम कर रहा है. जिन तालाबों में मछली पालन किया जाता है उन तालाबों में आइओटी के इस्तेमाल का प्रयास किया जा रहा है. अगर इसका प्रयोग सफल रहा तो आगे भी इसका प्रयोग किया जाएगा.

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