Flood In Bhagalpur: राहत शिविर में बाढ़ पीड़ितों को लग रहा मेले जैसा माहौल

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बाढ़ से जिले के लगभग 93 पंचायत प्रभावित हैं. बाढ़ के कारण दियारा इलाके के लोगों ने अपना घर छोड़कर राहत शिविर या अन्य ऊंचे स्थान पर शरण ले लिये हैं. प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावितों के लिए राहत शिविर में सामुदायिक किचन चलाया जा रहा है. जहां लोगों को दो टाइम का भोजन मिल रहा है. वहीं पशुओं के रहने और चारे की भी व्यवस्था की गई है. शिविर में डॉक्टरों की भी व्यवस्था है.
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बाढ़ राहत शिविर और समुदाय किचन को लेकर लगातार जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री के दावे का ईटीवी भारत के संवाददाता ने रात के अंधेरे में जायजा लिया. मौके पर पहुंचने पर राहत शिविर की व्यवस्था चाक-चौबंद नजर आयी. वहीं शिविर में रहने वाले लोगों ने कहा कि राहत शिविर में मेले जैसा माहौल है.

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार बाढ़ पीड़ित को हर संभव सहायता पहुंचाने के निर्देश अधिकारियों को रहे हैं. खुद मुख्यमंत्री राहत शिविर का दौरा कर रहे हैं. भागलपुर में हवाई अड्डा में बने राहत शिविर का माहौल मेले जैसा है. यहां के लोगों को रहने के लिए शिविर के अलावा सामुदायिक किचन भी चलाया जा रहा है. वहीं जानवरों के लिए पंडाल है.


राहत शिविर में लाइटिंग की चौबीसो घंटे व्यवस्था की है. पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध है. 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था है. साथ हीं मवेशी के लिये चारा और डॉक्टर भी उपलब्ध कराया है. वहीं कोविड-19 से बचाव के लिये टीकाकरण की भी व्यवस्था है. बच्चों के लिए आंगनवाड़ी केंद्र खोला गया है. जिसमें नौनिहाल बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं.

राहत शिविर में गर्भवती महिलाओं के लिए अलग से पोष्टिक आहार और छोटे बच्चे के लिए दूध की व्यवस्था है. समय-समय पर डॉक्टर भी बीमार लोगों का हाल-चाल जान रहे हैं. उन्हें आवश्यक दवाई दिया जा रहा है. शिविर का जायजा लेने के लिए समय-समय पर अंचल अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, एसडीओ सहित अन्य वरीय पदाधिकारी लेते रहते हैं और लोगों से बातचीत करते हैं.

हवाई अड्डा स्थित बाढ़ राहत शिविर में रह रहे शहजादपुर पंचायत के विनोद मंडल ने बताया कि वह 4 दिन से शिविर में रह रहे हैं. शिविर का माहौल ऐसा है जैसे वे किसी मेले में आए हैं. उन्होंने कहा कि 24 घंटे बिजली की व्यवस्था है. पंखे के नीचे ही सोते हैं. विनोद मंडल ने कहा कि यहां आदमी के लिए अलग से डॉक्टर है तो वहीं मवेशी के लिए भी पशु चारे की व्यवस्था की गई है और डॉक्टर भी मौजूद हैं.

बाढ़ पीड़ित ने कहा कि यहां लोगों को पीने के लिए स्वच्छ पानी की व्यवस्था है. लोगों को भरपूर भोजन मिल रहा है. भोजन का स्वाद भी टेस्टी है. उन्होंने कहा कि यहां का माहौल मेरे यहां लगने वाला सबसे बड़ा "मढवा मेला" से भी बढ़कर है. राहत शिविर में वरीय अधिकारी भी लोगों से बातचीत करने पहुंचते हैं. वो लोगों से घूम-घूम कर हालचाल जानते हैं. यहां लोगों को कोई भी दिक्कत नहीं हो रही है.


राहत शिविर में तीन दिनों से रह रहे छोटे लाल मंडल ने बताया कि व्यवस्था में कहीं कोई कमी नहीं है. खाना दो टाइम चावल-दाल और सब्जी मिल रहा है. डॉक्टर भी समय-समय पर जांच पड़ताल करते रहते हैं. खाने के लिए अलग व्यवस्था है और रहने के लिए अलग व्यवस्था है. वहीं राहत शिविर के पास ही शौचालय का भी निर्माण करवाया जा रहा है. लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो रही है.

वहीं अमरी बिशनपुर पंचायत की रहने वाली बाढ़ पीड़िता कुंदन देवी ने बताया कि वह चार दिन से राहत शिविर में रह रही है. बाढ़ पीड़िता ने कहा कि यहां खाने की व्यवस्था बढ़िया है. वहीं उन्होंने कहा कि शिविर में डॉक्टर जांच करते हैं लेकिन दवाई नहीं देते हैं. यहां पानी के लिए टैंकर आता है. गाय भैंस के लिए भी चारा दिया जा रहा है.

बाढ़ राहत शिविर की व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे प्रखंड विकास पदाधिकारी ने कहा कि यहां राहत शिविर के साथ-साथ समुदाय किचन भी चलाया जा रहा है. जिसमें नाथनगर और नारायणपुर प्रखंड के करीब 750 परिवार रह रहे हैं. जिसके लिए सभी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. उन्होंने कहा कि पशुओं के लिए चारे की भी व्यवस्था है. पशुओं के रहने के लिए अलग से पंडाल बनाया गया है.

उन्होंने कहा कि कोरोना को लेकर टीकाकरण की भी व्यवस्था की गई है. आंगनवाड़ी केंद्र खोला गया है जिसमें बच्चे पढ़ रहे हैं. वहीं शिविर में 18 गर्भवती महिलाओं को चिन्हित किया गया है. जिसमें से 8 महिला की डिलीवरी इसी महीने होना है. जिसे देखते हुए उनके लिए सभी प्रकार की व्यवस्था की गई है. बच्चों के लिए अलग से पौष्टिक आहार की व्यवस्था है. बीडीओ ने कहा कि शिविर में हर संभव मदद की जा रही है. डॉक्टर की टीम यहां पर 24 घंटे रह रही है.

बता दें कि जिले में 16 प्रखंड में से सुल्तानगंज, शाहकुंड, नाथनगर, गोराडीह, सबौर, कहलगांव, पीरपैंती, नवगछिया, गोपालपुर, इस्माइलपुर, खरीक, रंगरा चौक, बिहपुर और नारायणपुर प्रखंड बाढ़ से प्रभावित है. इन प्रखंडों के लगभग साठ प्रतिशत पंचायत बाढ़ से प्रभावित हैं.

यहां के 6517 हेक्टेयर कृषि योग्य जमीन बाढ़ के पानी में डूबा हुआ है. वहीं 600 हेक्टेयर गैर कृषि योग्य जमीन बाढ़ से प्रभावित है. जबकि 1360 हेक्टेयर भूमि में लगी फसल क्षतिग्रस्त हो गई है. जिले में बाढ़ से लगभग 42 हजार से अधिक मवेशी भी प्रभावित हैं.

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