क्रिकेट के 'दादा' सौरव गांगुली हमेशा ही अपनी दादागिरी के लिए मशहूर रहे हैं. मैच के दौरान सामने वाली टीम को अपना दम दिखाना हो या फिर अम्पायर से दादागिरी की बात हो. एक बार तो हरभजन सिंह को टीम में शामिल करने के लिए उन्होंने सेलेक्टर्स के सामने ही दादागिरी दिखा दी थी.
भज्जी के लिए सेलेक्टर्स से 'भिड़े' दादा
ये बात साल 2001 की है, जब बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए भारतीय क्रिकेट टीम का चयन किया जा रहा था. उस वक्त सौरव गांगुली इंडियन क्रिकेट टीम के कप्तान थे, उन्होंने चयनकर्ताओं से हरभजन सिंह को टीम में रखने की अपील की, हालांकि सेलेक्टर्स उस वक्त भज्जी को उतना पसंद नहीं करते थे. लेकिन, दादा अपनी बातों पर अड़े रहे.
इसी बीच दादा ने अपनी दादागिरी दिखा दी और उन्होंने साफ-साफ ये बोल दिया कि "जब तक टीम में नहीं हरभजन को नहीं लिया जाएगा, मैं इस कमरे से बाहर नहीं जाऊंगा." सौरव की इस दादागिरी के आगे सेलेक्टर्स को झुकना पड़ गया. आखिरकार उन्होंने सभी को अपनी बात मानने पर मजबूर ही कर दिया.
दादा की ये दादागिरी साबित हुई कारगर
क्रिकेट के दादा की इस दादागिरी का अंजाम वाकई बेहद दिलचस्प हुआ. ये किस्सा गजब का है, क्योंकि हरभजन सिंह ने इस मैच के मैन ऑफ द मैच का खिलाफ हासिल कर लिया.
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