
पियरसिंग कराते आजकल हर किसी को देखा जा सकता है। चाहें लड़का हो या लड़की पियरसिंग दोनों में ही ट्रेंडिंग है। हालांकि बात अगर पंरपरा और अपनी संस्कृति की करें तो बहुत पहले से कान या नाक छिदवाने का प्रचलन है। पहले के जमाने में महिला एंव पुरुष दोनों ही कान छिदवाते थे। इसके साथ ही पुराने जमाने में नाक छिदवाना महिलाओं के लिए अनिवार्य था। साज-सज्जा की दृष्टि से महत्वपूर्ण ये आभूषण स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण थे। बहुत कम लोगों को ही इस बारे में पता है कि आखिर क्यों महिलाओं के लिए ऐसा जरुरी माना जाता था।
नाक या कान छिदवाने को हम भले ही श्रृंगार के तौर पर देखते हो, लेकिन इसके पीछे भी विज्ञान है। दरअसल, वेदों और शास्त्रों में ऐसा लिखा गया है कि, नाक छिदवाने से महिला को माहवारी की पीड़ा से राहत मिलती है। इसके अलावा डिलीवरी के दौरान बच्चे को जन्म देने में भी काफी आसानी रहती है। माइग्रेन के दर्द से भी यह काफी हद तक राहत दिलाता है।
अब सवाल यह आता है कि, लड़कियों की नाक बाईं ओर ही क्यों छेदी जाती है? क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है? तो चलिए इस राज से भी आज पर्दा उठाते हैं। दरअसल, नाक के बाईं ओर में उस जगह की कुछ नसों का संबंध प्रजनन अंगों से होता है। इस हिस्से पर छेद करने से प्रसव पीड़ा काफी हद तक कम हो जाती है।
कुछ लोगों का तो ऐसा भी कहना है कि, बाईं तरफ कान छेदने से उच्च रक्तचाप जैसी परेशानियों से भी निजात मिलता है। नाक या कान किसी भी उम्र में छिदवा सकते हैं। बचपन से लेकर वयस्क किसी भी अवस्था में ऐसा किया जा सकता है। इसका शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।
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