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इस बार कई जगहों पर भीषण ठंड पड़ने की संभावना है. भारत समेत दुनिया के कई शहरों में तापमान माइनस के नीचे चला जाता है. मगर क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा गांव है जहां का न्यूनतम तापमान -71 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है?
हम बात कर रहे हैं रूस के साइबेरिया के गांव ओम्याकोन की. ठंड में यहां लोगों का हाल बेहाल हो जाता है. यहां ठंड का आलम ये होता है कि यहां कोई भी फसल नहीं उगती है. लोग अधिकतर मांस खाकर जिंदा रहते हैं.
ठंड में भी बच्चे जाते हैं स्कूल सर्दियों के वक्त यहां बच्चे औसतन -50 डिग्री तापमान तक ही स्कूल जाते हैं. फिर यहां स्कूल भी बंद कर दिये जाते हैं. बच्चों को यहां के तापमान के हिसाब से सख्त बनाया जाता है. इस वजह से 11 साल से बड़े बच्चों को ठंड से बचने के लिए -56 डिग्री सेल्सियस तापमान के नीचे ही घर में रुकने की अनुमति होती है. सर्दियों में दिन का तापमान -45 से -50 डिग्री सेल्सियस तक होता है. ऐसे में सभी बच्चों को स्कूल जाना पड़ता है. यहां दिसंबर के महीने में सूरज 10 बजे के करीब उगता है.
अंटार्कटिका के बाहर इसे दुनिया की सबसे ठंडी जगह माना जाता है. साल 1924 में इस जगह का तापमान -71.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था. 2018 के आंकड़ों के मुताबिक यहां 500 से 900 लोग रहते हैं. इस लोगों पर फ्रॉस्टबाइट या पाला मारने का खतरा हमेशा बना रहता है.
गाड़ियों को हर वक्त रखना पड़ता है स्टार्ट
लोगों को कई तरह की मुश्किल का सामना करना पड़ता है. गाड़ियों की बैट्री ना जमे इस वजह से गाड़ियों को हर वक्त स्टार्ट किए रहना पड़ता है. यहां के लोग अलग-अलग तरह के मांस खाते हैं. यहां रेंडियर और घोड़े के मास के अलावा लोग स्ट्रोगनीना मछली का खूब सेवन करते हैं. जून-जुलाई में जब दुनिया के कई हिस्सों में भयंकर गर्मी पड़ती है, तब यहां का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस होता है.
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