हैवानियत चरम पर थी, बच्चे बोले- हम घर जाने को कहते तो पिला देते थे शराब, गंदी हरकत भी करते थे




कमिश्नरेट पुलिस, जिला प्रशासन और बचपन बचाओ आंदोलन की संयुक्त टीम ने संघा फार्म हाउस पर छापेमारी की तो वहां दो बच्चे मिले।

फोलड़ीवाल, कादियांवाल के फार्म हाउस से छुड़ाए बच्चों का रौंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा-

कमिश्नरेट पुलिस, जिला प्रशासन और बचपन बचाओ आंदोलन की संयुक्त टीम की छापेमारी में दूसरे दिन बंधक बनाकर लाए गए 2 और बाल श्रमिक छुड़वाए गए हैं। अब तक फोलड़ीवाल के फार्म हाउस से बाल मजदूरी करने वाले 40 नाबालिग छुड़ाए जा चुके हैं। मुक्त हुए बच्चाें ने ठेकेदारों द्वारा उनके साथ की जा रही हैवानियत का खुलासा किया है। बच्चों ने बताया कि परवेश सादा, लीलेश यादव, अनिल और छबीला नाम के ठेकेदार बिहार के विभिन्न जिलों से नाबालिग बच्चों को बंधक बनाकर यहां लाते हैं। इनका सरगना परवेश सादा है। जब कभी बच्चे घर जाने की बात कहते थे तो परवेश उन्हें जबरन शराब पिलाता था अौर नशे की हालत में उन्हें आलू के खेतों में काम करने के लिए छोड़ देता था।

शारीरिक यातनाएं देते थे... पुलिस से बचने को दो बच्चे तहखाने में कर दिए थे बंद

जब बच्चे नशे में काम नहीं कर पाते थे तो उन्हें शारीरिक यातनाएं देता था। यदि कोई बच्चा घर जाने की जिद करता था तो उन्हें इतनी अधिक शराब पिला दी जाती थी कि बच्चा 3 से 4 दिन तक होश में ही नहीं आता था। कुछ बच्चों ने नशे की हालत में उनसे गंदा काम करने की भी बात कही है। पुलिस खगड़िया जिले के थाना चौथाम के गांव खरैता निवासी सरगना परवेश सादा की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। सीडब्ल्यूसी पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।

बचपन बचाओ आंदोलन के कोआर्डिनेटर दिनेश कुमार ने बताया कि पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर के निर्देशों पर जब पहले दिन छापेमारी हुई तो देर रात तक 38 बच्चे मुक्त कराए गए थे। बच्चों के बयान के आधार पर ठेकेदार परवेश सादा की तलाश में दूसरे दिन भी फार्म हाउस में छापेमारी की गई। इस दौरान फार्म हाउस पर बंधक बनाकर लाए गए दो और बच्चे मिले। बच्चों ने बताया कि उन्हें ठेकेदार ने तहखाने में बंद कर दिया था ताकि कोई खोज न सके। दिनेश का कहना है कि बच्चों ने ही परवेश के अलावा तीन अन्य ठेकेदारों के नाम बताए हैं। फिलहाल किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

बिहार से बच्चों की तस्करी का चल रहा रैकेट... बच्चों की तस्करी का मास्टर माइंड परवेश सादा बिहार राज्य के खगड़िया जिले का रहने वाला है। उसने बच्चों की तस्करी करने वाले ठेकेदारों का रैकेट बना रखा है। इनमें लीलेश यादव, अनिल और छबीला जैसे कई लोग शामिल हैं। ये लोग बिहार के सीतामढ़ी और खगड़िया जैसे जिलों से गरीब परिवारों के बच्चों को नौकरी दिलाने के बहाने लाते हैं। उनके परिजनों को यह भी नहीं बताया जाता है कि उन्हें कहां ले जा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि बच्चों को रास्ता भी पता नहीं लगने दिया जाता ताकि वे दोबारा अपने घरों को न लौट सकें।

सरगना को पकड़ने के लिए पुलिस टीम की छापेमारी... जालंधर वेलफेयर सोसायटी के सेक्रेटरी एवं सोशल वर्कर सुरिंदर सैनी का कहना है कि उनकी सोसायटी कई वर्षों से बाल श्रम के खिलाफ जंग लड़ रही है। कई बार उन्होंने जिले के विभिन्न हिस्सों में बंधक बनाकर काम कराए जाने कि शिकायत मिलने पर अभियान चलाकर बच्चों की छुड़वाया है। जहां पर बच्चे काम कर रहे हैं, उन लोगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं बचपन बचाओ आंदोलन के दिनेश का कहना है कि ठेकेदार के साथ इसमें दोषी अन्य लोगों पर भी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

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