
भारत के अलावा बाकी दुनिया में इसे 'कैटरपिलर फंगस' के नाम से भी जाना जाता है।गौरतलब है कि कैटरपिलर फंगस नामक कीड़े से बनी जड़ी-बूटी से नपुंसकता दूर हो जाती है। इसका चाय या फिर सूप बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि विज्ञान इस दावे को सही नहीं मानता है। इसी के साथ यह जड़ी-बूटी गुर्दे और सांस की बीमारी के लिए भी दवा के रूप में इस्तेमाल की जाती है।

यहां तक कि नेपाल में वर्ष 2001 में इस पर प्रतिबंध लगा हुआ था लेकिन अब इसे खत्म कर दिया गया है। इसकी पैदावार के लिए कैटरपिलर फंगस नामक यह कीड़ा सर्दियों में एक विशेष प्रकार के पौधों के रस से निकलता है। यह मई-जून में खत्म हो जाता है। इसकी उम्र छह महीने तक होती है। ये कीड़े मरने के बाद पहाड़ियों में घास और पौधों के बीच में बिखर जाते हैं। इसकी मांग चीन में सबसे ज्यादा है। कहते हैं कि इसके उपयोग से मर्दाना ताकत आती है। इसीलिए इस जड़ी-बूटी की कीमत सोने-चांदी के भाव से भी ज्यादा है।
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