रियाद :भारत में जब नागरिकता क़ानून के खिलाफ आंदोलन चला था उस का समर्थन अंतरास्ट्रीय अस्तर पर की गई थी ,संयुक्त राष्ट्र और दूसरे अंतरास्ट्रीय संसथा ने भी इस आंदोलन को भरपूर समर्थन दिया था ,तो वहीं सऊदी अरब में रह रहे हिंदुस्तानी मुसलामनों ने भी विवादास्पद भारतीय कानून CAA और NRC को लेकर सऊदी अरब में विरोध प्रदर्शन किया था।लेकिन अब खबर आरही है कि सऊदी अरब ने हिंदुस्तान के उन मज़दूर मुसलमानों को मुल्क से निकालना शुरू कर दिया है। जिन्होंने प्ले कार्ड उठा कर शाहीन बाग़ आंदोलनकारी का समर्थन किया था।
मुख्य रूप से बिहार के एनआरआई के एक समूह ने पिछले साल जेद्दा के बालाद शहर में भारत के प्रस्तावित एनआरसी के खिलाफ तख्तियां रखकर विरोध प्रदर्शन किया था। खाड़ी देशों में किसी भी तरह के विरोध, प्रदर्शन या सभाओं के प्रति शून्य सहिष्णुता है। इस बुनियादी नियम से अनजान कुछ युवा, जिन्होंने अवांछनीय पोस्ट करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया और सभा में भाग लिया, मुसीबत मौल ले ली।
उन्हें नियमों का उल्लंघन करने के लिए गिरफ्तार किया गया था जो किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन को प्रतिबंधित करता है। तब से वे घर लौटने का इंतजार कर रहे थे। उनके अलावा कुछ जो पिछले कुछ महीनों से सऊदी अरब के विभिन्न निर्वासन केंद्रों में बंद थे। इन लोगों को ट्रैफिक सिग्नल पर भीख मांगने के लिए गिरफ्तार किया गया था। साथ ही वे लोग भी शामिल है जो बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल राज्यों से सामान्य रूप से विभिन्न वीजा और रोजगार नियमों के उल्लंघन में पकड़े गए। सभी को भारत निर्वासित कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब की विभिन्न सरकारी एजेंसियों के अलावा, विभिन्न राज्यों में स्वदेश वापसी का सफलतापूर्वक प्रयास किया। कैदियों का प्रत्यावर्तन एक सतत प्रक्रिया है। लगभग 3000 एनआरआई कार्यकर्ताओं ने अपने घर भारत वापस भेज दिया।सऊदी अरब एयरलाइंस ने भारत में अब तक कुल 11 निर्वासित उड़ानों का संचालन किया है। एयरफ्रेट की लागत सऊदी अरब सरकार द्वारा वहन की जाती है। निर्वासन की उड़ानें नियमित और मिशन वंदे भारत की उड़ानों से अलग थीं।
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