
ऑकलैंड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार, जो महिला अपने गर्भावस्था के त्रैमासिक अवधि के दौरान एक तरफ मुंह करके लेटने कीबजाय पीठ के बल लेटती है, तो उनके जन्म लेने वाले बच्चे का वजन कम होने की संभावना तीन गुना तक बढ़ जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि गर्भावस्था के अंतिम दिनों में पीठ के बल लेटने से बच्चे में रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है। पीठ के बल लेटने पर मां के बड़े हुए गर्भ आकार की वजह से गर्भ नाल संकुचित हो जाती है।

शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि किसी भी तरह की बीमारी से बचे रहने के लिए गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से व्यायाम करना भी जरूरी है। व्यायाम से उनका ब्लड शुगर नियंत्रित रहने के साथ-साथ मां और बच्चे में टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा भी कम होता है। इसके साथ ही स्वास्थ्य अधिकारी गर्भावस्था के दौरान ज्यादा से ज्यादा सक्रिय रहने की सलाह देते हैं और वजन को नियंत्रित रखने के लिए जंक फूड खाने से बचने के लिए कहते हैं।
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