एक तरफ दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है वहीं भारत के पालघर में अधिकारियों ने घातक क्रिमियन कांगो हैमरेज फीवर (सीसीएचएफ) या कांगों फीवर को लेकर अलर्ट जारी किया है। प्रशासन की ओर से जारी परिपत्र में कहा गया है कि यह वायरल बीमारी एक खास तरह की किलनी के जरिए एक पशु से दूसरे पशु में फैलती है। यहां के कलेक्टरेट ने सभी मीट और पॉल्ट्री विक्रेताओं और उपभोक्ताओं को कांगो बुखार को लेकर अलर्ट रहने और एहतियात बरतने के लिए कहा है, जिसका मृत्युदर 10 से 40 प्रतिशत के बीच है। संक्रमित पशुओं के खून से और उनका मांस खाने से यह मनुष्य को भी अपनी चपेट में ले लेती है। अगर समय रहते रोग का पता नहीं चलता और इलाज नहीं होता है तो 30 फीसदी मरीजों की मौत हो जाती है। इसकी हाल-फिलहाल कोई वैक्सीन भी उपलब्ध नहीं।
क्या है कांगो फीवर
कांगो फीवर जानवरों में पाया जाने वाला एक तरह का वायरस है और जानवरों के संपर्क में आने पर इंसानों में भी फैल जाता है। माना जाता है कि कांगो बुखार सबसे ज्यादा अफ्रीकी और यूरोपियन देशों में ही होता है। हालांकि, अब ये कुछ अन्य देशों में भी अपना पैर पसारने लगा है।
बीमारियों को दूर भगाना है तो साफ मास्क का इस्तेमाल कीजिए
कांगो बुखार के लक्षण
1. बुखार के साथ मांसपेशियों में दर्द होता है।
2. आंखों में जलन, चक्कर आना जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।
3. पीठ दर्द, उल्टी के साथ गला बैठने जैसी समस्याएं।
4. मुंह व नाक से खून आना।
5. ऑर्गन फेलियर होने की संभावना।
बचाव
कांगो फीवर से बचने के लिए खेतीबाड़ी और पशुओं के साथ काम करने वाले व्यक्तियों को टीक (पिश्शू/चींचड़ा) से एतिहात बरतने की जरूरत है।
बचाव के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने के साथ ही जूते-मोजे भी पहनें।
अगर कहीं गाय, भैंस, बकरी आदि के शरीर पर टीक लगा हुआ है तो बिना देर किए उसे तुरंत पशु चिकित्सालय में दिखाएं।

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