श्रीकृष्ण को क्यों चढ़ाया जाता है 56 भोग, आपको जानना चाहिए

श्रीकृष्ण को क्यों चढ़ाया जाता है 56 भोग, आपको जानना चाहिए

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtami 2020) इस साल 11 और 12 अगस्त को दो दिन मनाई जा रही है. कोरोना महामारी (Corona epidemic) के कारण इस बार मंदिरों (Temple) में पिछले साल की तरह भव्य आयोजन नहीं होंगे, लेकिन भगवान को भोग हर जगह लगाया जाएगा. आपको पता होगा कि भगवान श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) को 56 भोग लगाया जाता है. श्री कृष्ण को समर्पित किये जाने वाले 56 भोग के पीछे की महिमा और कहानी क्या है आज हम आपको इसके बारे में बता रहे हैं. इसके संबंध में कई सारी रोचक कथाएं हैं....

पौराणिक कथा के अनुसार माता यशोदा बालकृष्ण को एक दिन में आठ बार भोजन कराती थीं. जब इन्द्र ने व्रज पर प्रकोप किया था और मुसलाधार बारिश होने लगी थी तो व्रज को बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठा लिया था. तब लगातार सात दिन तक भगवान ने अन्न-जल ग्रहण नहीं किया था.

आठवें दिन जब इन्द्र की वर्षा बंद हो गई तब श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को गोवर्धन पर्वत से बाहर निकलने के लिए कहा. तब दिन में आठ पहर भोजन करने वाले बालकृष्ण को लगातार सात दिन तक भूखा रहना उनके ब्रजवासियों और मैया यशोदा के लिए बड़ा कष्टप्रद लगा था. तब भगवान के प्रति अपनी अनन्य श्रद्धाभक्ति दिखाते हुए सभी ब्रजवासियों और माता यशोदा माता ने सात दिन और अष्ट पहर के हिसाब से 7X8=56 व्यंजन बालगोपाल को परोसे थे.

56 सखियां हैं 56 भोग
56 भोग के बारे में एक दूसरी मान्यता है कि गो लोक में भगवान श्रीकृष्ण राधा जी के साथ एक दिव्य कमल पर विराजते हैं. उस कमल की 3 परतें हैं. इसके तहत प्रथम परत में 8, दूसरी में 16 और तीसरी में 32 पंखुड़ियां होती हैं. इस प्रत्येक पंखुड़ी पर एक प्रमुख सखी और मध्य में भगवान विराजते हैं, इस तरह कुल पंखुड़ियों की संख्या 56 है. यहां 56 संख्या का यही अर्थ है. अत: भगवान कृष्ण 56 भोग से सखियों संग तृप्त होते हैं.

श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए गोपिकाओं ने भेंट किए 56 भोग
इससे जुड़ी एक और मान्यता है. श्रीमद्भागवत कथा के अनुसार जब कृष्ण को गोपिकाओं ने अपने पति रूप में पाने के लिए एक महीने तक यमुना में भोर में ही न केवल स्नान किया, बल्कि कात्यायिनी मां की पूजा-अर्चना की. जिससे कि उनकी मनोकामना पूर्ण हो. तब श्रीकृष्ण ने उनकी मनोकामना पूर्ति की सहमति दे दी थी. तब व्रत समाप्ति और मनोकामना पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ही उद्यापनस्वरूप गोपिकाओं ने 56 भोग का आयोजन करके भगवान श्रीकृष्ण को भेंट किया

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