
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाए जाने को एक साल पूरे हो रहे हैं. ऐसे में बीजेपी इसे लेकर उत्साहित है. बीजेपी ने इस घटना को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के जीवन का बदलाव वाला अच्छा समय करार दिया. वहीं शिवसेना का कहना है कि अभी भी कई सारे सवालों के जवाब मिलना बाकी हैं.
शिवसेना के नेता संजय राउत ने सीएनएन न्यूज 18 से कहा कि सरकार को हमें यह जरूर बताना चाहिए कि जम्मू और कश्मीर में इस एक साल में क्या-क्या बदला. इस दौरान क्या जीत हुई और क्या हार हुई? बीजेपी पर हमलावर अंदाज में बोलते हुए संजय राउत ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि राज्य कई हिस्सों में लगातार लॉकडाउन क्यों लगा हुआ है. इंटरनेट सेवाएं बंद हैं. कई सारे नेता अभी भी हिरासत में हैं.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती सहित कई राजनीतिक नेताओं को पिछले साल 5 अगस्त को हिरासत में लिया गया था. उन्हें उसी दिन हिरासत में लिया गया जिस दिन मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाया था. साथ ही राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदल दिया गया था. जबकि मुफ्ती को छह महीने के लिए निवारक हिरासत में रखा गया था, उन्हें इस साल फरवरी में उमर के साथ पीएसए के तहत बुक किया गया था.
संजय राउत ने पूछा कि केंद्र सरकार द्वारा किए गए सभी उपायों के बावजूद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हमले जारी हैं. उन्होंने कहा, 'रक्तपात जारी है और पाकिस्तान हमें एक हजार कटौती के साथ खून बहाना जारी रखता है. अब वे और भी अधिक बढ़ गए हैं जो चीन ने गालवान घाटी में किया है. केंद्र को इन सभी सवालों का जवाब देना चाहिए. वास्तव में, इस पर चर्चा होनी चाहिए.'
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