स्पीकर ने अयोग्यता कार्यवाही पर हाई कोर्ट के आदेश को दी चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

स्पीकर ने अयोग्यता कार्यवाही पर हाई कोर्ट के आदेश को दी चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

राजस्थान का सियासी रार अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने सचिन पायलट समते 19 बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता कार्यवाही पर रोक लगाने वाले राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दूसरी ओर सचिन पायलट ने इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी है, ताकि बगैर उनका पक्ष सुने कोर्ट मामले में कोई आदेश न जारी कर दे। मामले में आज तीन जज की पीठ सुनवाई करेगी।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के ‘किहोतो होलां’ केस का उदाहरण दे हाई कोर्ट द्वारा स्पीकर को कार्यवाही से रोकने का आदेश को गलत बताया गया है। ‘किहोतो होलां’ केस में दी गई व्यवस्था के मुताबकि कोर्ट स्पीकर के निर्णय लेने या कार्यवाही में दखल नहीं दे सकता। स्पीकर ने याचिका में हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की है।

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 212 का हवाला दे कहा गया है कि सदस्यों को जारी किया गया नोटिस कार्यवाही का हिस्सा है और इसकी न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती। इसमें यह भी कहा गया कि नोटिस में विधायकों से जवाब मांगी गई है और ये सदस्यों की अयोग्यता के मामले में अंतिम निर्णय नहीं है। यह इस प्रक्रिया की शुरुआत है।

जोशी ने कहा है कि उन्होंने स्पीकर और कोर्ट के फैसलों के बीच विरोधाभास से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दायर की है। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआइ को बताया, ‘मेरा प्रयास राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करना था, इसलिए मैंने अदालत के कहने पर 21 जुलाई को एक्शन नहीं लिया। कल, अदालत ने मुझे 24 जुलाई तक इंतजार करने के लिए कहा और मैंने उसका भी सम्मान किया। चूंकि मामला अदालत में है, इसलिए अध्यक्ष आगे कुछ नहीं कर सकता। मैंने स्पीकर और कोर्ट के फैसलों के बीच विरोधाभास से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन दायर की है।’

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते पार्टी ने कांग्रेस विधायक दल की बैठक को लेकर व्हिप जारी किया था। पायलट और 19 विधायक बैठक में शामिल नहीं हुए। इसके बाद स्पीकर ने इन्हें दल-बदल कानून के तहत इन्हें अयोग्य ठहराने का नोटिस जारी किया। पायलट खेमे ने इसके बाद नोटिस को राजस्थान हाई कोर्ट में चुनौती दी। उनका कहना है कि व्हिप विधानसभा सत्र के दौरान लागू होता है ना कि पार्टी बैठक के लिए।

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