भारत की कार्रवाई के बाद अब ऑस्ट्रेलिया करने जा रहा है चीन के खिलाफ मोर्चाबंदी, जानिए पूरा मामला

दुनिया भर के देश अब चीन को घेरने लगे हैं, चाहे वह कोरोना वायरस की महामारी को लेकर हो या फिर उसकी आक्रामक विस्तारवादी नीति. भारत के चीनी 59 ऐप बैन करने की कार्रवाई के बाद अब ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने चीन पर दबाव बढ़ाने के लिए एक नया ऐलान किया है. बता दें कि ऑस्ट्रेलिया के कोरोना वायरस की महामारी की स्वतंत्र जांच की मांग करने के बाद से ही चीन-ऑस्ट्रेलिया के संबंध तनावपूर्ण चल रहे हैं.



ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने बुधवार को कहा कि ऑस्ट्रेलिया अगले 10 सालों में अपना रक्षा बजट 40 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ाएगा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए लंबी मारक क्षमता वाले हथियारों की खरीदारी करेगा. ऑस्ट्रेलिया के पीएम मॉरिसन ने कहा, ऑस्ट्रेलिया अगले 10 सालों में हवा, समुद्र और जमीन पर लंबी दूरी तक लक्ष्य भेदने वाले हथियारों को खरीदने के लिए 186 अरब डॉलर की धनराशि खर्च करेगा. ऑस्ट्रेलिया के इस कदम को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन को चुनौती देने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.



मॉरिसन ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया अपनी सेना का फोकस हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ही रखेगी. उन्होंने चीन का नाम लिए बगैर कहा, "हम हिंद प्रशांत क्षेत्र को दादागिरी और किसी एक के प्रभुत्व से मुक्त रखना चाहते हैं. हम इसे ऐसा इलाका बनाना चाहते हैं जहां सभी बड़े और छोटे देश अंतरराष्ट्रीय नियमों और प्रावधानों का पालन करते हुए एक-दूसरे के साथ मुक्त रूप से व्यापार कर सकें."

वही सिडनी के लोई इंस्टिट्यूट इंटरनेशनल सिक्योरिटी प्रोग्राम के डायरेक्टर सैम रोजेवीन ने रॉयटर्स से कहा, "चीन एक ऐसी मुश्किल है जिसे झेल तो हर कोई रहा है लेकिन उसके खिलाफ कोई कुछ बोलना नहीं चाहता है. ये बिल्कुल सही फैसला है कि हम अपने क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करें लेकिन जमीन से हमला करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलें खरीदना चीन को पलटवार करने का न्योता दे सकता है."

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