जानिए भारत के उस बाबा के बारे में जिसके सामने विश्व विजेता सिकंदर भी नतमस्तक हुआ था

जानिए भारत के उस बाबा के बारे में जिसके सामने विश्व विजेता सिकंदर भी नतमस्तक हुआ था

16 वर्ष की आयु में, अरस्तू से शिक्षा प्राप्त कर सिकंदर राज्य में वापस आ गया। उसी समय फिलिप ने बाइजेंटियम के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया, और सिकंदर को राज्य का प्रभारी बना कर उसकी देख रेख में छोड़ दिया। फिलिप की अनुपस्थिति के दौरान, थ्रेसियन मैदी ने मैसिडोनिया के खिलाफ विद्रोह कर दिया। सिकंदर ने तुरंत उनके खिलाफ़ अभियान चलाकर उन्हें अपने इलाके से खदेड़ दिया। बाद में उसी इलाके में यूनानियों के साथ एक उपनिवेश स्थापित कर अलेक्जेंड्रोपोलिस नामक एक शहर की स्थापना भी की।

दोस्तों आप सभी लोगों को तो भारतीय इतिहास के एक महान राजा सिकंदर के बारे में जरूर मालूम होगा सिकंदर को पूरी दुनिया को जीतने वाला व्यक्ति के रूप में जाना जाता है सिकंदर ने तुर्किस्तान यूनान ईरान अफगानिस्तान पाकिस्तान जैसे देशों में अपना साम्राज्य फैलाया हुआ था लेकिन क्या आप लोगों को मालूम है जब सिकंदर भारत पर आक्रमण किया था उसे भारत के एक महान राजा पोरस के हाथों हार का सामना करना पड़ा था लेकिन जब सिकंदर अपने देश वापस जा रहा था तब वह अपने साथ भारत से एक ज्ञानी व्यक्ति को ले जाना चाहा।

उसके बाद सिकंदर को भारत के एक बाबा के बारे में मालूम हुआ तत्पश्चात वह अपने सैनिकों के साथ उस बाबा के पास पहुंचा तब जाकर उसने देखा कि वह बाबा एक पेड़ के नीचे ध्यान लगाकर निर्वस्त्र बैठे हैं उसके बाद सिकंदर बाबा का ध्यान खत्म होने का इंतजार करने लगा कुछ देर बाद जब बाबा ध्यान से बाहर निकले तब सिकंदर के सैनिकों ने महान सिकंदर महान सिकंदर के नारे लगाने लगे उसके बाद सिकंदर ने बाबा से कहा मैं आपको अपने देश ले जाना चाहता हूं तत्पश्चात बाबा ने सिकंदर से कहा मैं तो यही ठीक हूं तुम्हें जहां जाना है जाओ।

एक मामूली संत का यह जवाब सुनकर सिकंदर के सैनिक भड़क उठे लेकिन सिकंदर ने सैनिकों को शांत करते हुए बाबा से कहा मैं नहीं सुनने का आदी नहीं हूं उसके बाद वह बाबा बिना घबराए सिकंदर से कहा मेरा जीवन यही है और मैं ही तय कर सकता हूं कि मुझे कहां जाना है और कहां नहीं।

यह सुनकर सिकंदर और भी ज्यादा क्रोधित हो गया और गुस्से में उसने फौरन ही अपनी तलवार निकालकर बाबा के गले में सटा दी उसके बाद भी वह बाबा शांत ही रहा और सिकंदर से कहा कि मैं कहीं नहीं जा रहा मैं यहीं रहूंगा अगर तुम मुझे मारना चाहते हो तो मार दो। मगर आज के बाद कभी भी अपने नाम के साथ महान शब्द का प्रयोग मत करना क्योंकि तुम मेरे गुलाम के भी गुलाम हो।

यह सुनते ही सिकंदर उस बाबा से कहानी लगा तुम्हारा मतलब क्या है तब बाबा ने कहा क्रोध मेरा गुलाम है और जब तक मैं नहीं चाहता मुझे क्रोध नहीं आता पर तुमको से गुलाम हो तुमने कहीं योद्धाओं को पराजित किया होगा पर क्रोध से नहीं जीत पाए बाबा की यह बात सुनकर सिकंदर अपने अभिमान से चकनाचूर हो गया और उनके चरणों में पड़ गया और सिकंदर ने उस बाबा को वहीं पर रहने का आदेश देकर अपने सैनिकों के साथ भारत देश छोड़कर अपने देश लौट गया।

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