
टिड्डी (Locust) ऐक्रिडाइइडी (Acridiide) परिवार के ऑर्थाप्टेरा (Orthoptera) गण का कीट है। हेमिप्टेरा (Hemiptera) गण के सिकेडा (Cicada) वंश का कीट भी टिड्डी या फसल डिड्डी (Harvest Locust) कहलाता है। इसे लधुश्रृंगीय टिड्डा (Short Horned Grasshopper) भी कहते हैं। संपूर्ण संसार में इसकी केवल छह जातियाँ पाई जाती हैं। यह प्रवासी कीट है और इसकी उड़ान दो हजार मील तक पाई गई है।
टिड्डियों (Locusts) की वजह से उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के किसानों को भारी नुकसान की आशंका है. अभी तक 31 जिलों में टिड्डियों का प्रकोप हो चुका है. जो जिले बचे हैं, वहां भी इनके नुकसान की आशंका बनी हुई है. ऐसे में फसलों, सब्ज़ियों और बागों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए राज्य सरकार (State Government) किसानों को मुआवजा देने की तैयारी में जुट गई है.
किसानों को आपदा राहत के तहत मुआवजा दिए जाने की तैयारी की जा रही है. हर जिले में टिड्डियों से हुए नुकसान की जिला प्रशासन रिपोर्ट तैयार कर रहा है. कृषि विभाग ने एक प्रोफार्मा भी तैयार किया है, जिसके आधार पर नुकसान के एवज में सरकारी राहत किसानों को दी जाएगी. अपर कृषि निदेशक कृषि रक्षा सुनील कुमार अग्निहोत्री ने बताया कि सरकार में इस पर गंभीरता से बात चल रही है. आपदा राहत का जो सिस्टम रहता है, उसमें जिला प्रशासन द्वारा किसानों को मदद दी जाएगी.
अभी कहां सक्रिय हैं टिड्डियां
कृषि विभाग के अफसरों ने बताया कि गुरुवार शाम को टिड्डियों का दल झांसी और ललितपुर के बीच था. हवा के रुख पर इनकी उड़ान और ठिकाना दोनों तय होता है. 23 मई को सबसे पहले झांसी के रास्ते प्रदेश में इनकी आमद हुई थी. अभी तक पूर्वांचल, पश्चिम, बुंदेलखंड और ब्रज क्षेत्र के 31 जिलों में इनका प्रकोप हो चुका है. सिर्फ सेंट्रल यूपी और तराई के कुछ जिले ही बच पाए हैं. हालांकि कब तक बचे रहेंगे? ये कहना मुश्किल है. 31 शहरों में इन्होंने रात बिताई है. जहां रुकीं, वहां चारों ओर तबाही.
और बढ़ता जाएगा नुकसान
टिड्डियों की वजह से फसलों को अब और भी नुकसान होने का खतरा बढ़ गया है. अभी तक तो इन्हें चट करने के लिए ढैचा और मक्का जैसी फसलें ही मिलती थीं लेकिन अब तो धान की रोपाई शुरू हो गई है. ज्वार, बाजरा को भी बम्पर नुकसान संभव है. कृषि विभाग को कुछ नहीं पता है कि अभी कितने समय तक इनका प्रकोप चलता रहेगा. विभाग के अनुमान के मुताबिक ये समस्या अगले 3 से 4 महीने तक बनी रह सकती है. ऐसे में किस जिले की फसल बचेगी? ये कहना मुश्किल है.
कितने बड़े झुंड में उड़ान भरते हैं
टिड्डियों के झुंड की साइज को जानकर आपको भरोसा नहीं होगा. यूपी में टिड्डियों का जो सबसे बड़ा दल अभी तक कृषि विभाग ने रिपोर्ट किया है वह 45 स्क्वायर किलोमीटर क्षेत्रफल का रहा है. 15 किलोमीटर लंबा और 3 किलोमीटर चौड़ा. इसके अतिरिक्त छोटे-छोटे दल भी प्रदेश में उड़ान भर रहे हैं. दिन के समय जिन शहरों की तरफ से टिड्डियों का दल उड़ान भरता है वहां सूरज की रोशनी थम जाती है. दिन में अंधेरा छाने लगता है. राजस्थान हरियाणा और मध्य प्रदेश से सटे जिलों के जरिए टिड्डियां यूपी में दाखिल हो रही है.
प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने वाला टिड्डियों का बड़ा दल छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटकर एक साथ कई जिलों में पहुंच जाता है. यह सबसे बड़ी समस्या है. हालांकि इनको मारने के उपाय भी काफी कारगर हो रहे है. जिन जिलों में टिड्डियां रात में रूकती हैं वहां दवा के छिड़काव से इनकी 60 से 70 फ़ीसदी आबादी नष्ट हो जाती है लेकिन आमद इतनी है कि प्रकोप खत्म होने का नाम नही ले रहा है. राज्य सरकार ने कृषि विभाग को 5 करोड़ का बजट दिया है जिससे इनपर लगाम लगाई जा सके.
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