
हमने बहुत बार ऐसी बतखें देखि है जो बहुत अजीब होती है पर आज हम ऐसी बतख दिखाने जा रहें है जो पूरी तरह से अलग है इस बतख को स्तनधारी बतख कहते हैं। यह बतख प्रजनन और उत्सर्जन दोनों में समान है कुछ लोग इसे एक पौधा भी मानते है क्योकि इस बतख को नजदीक से देखना बहुत मुश्किल है ये पानी के तले में रहती है जहाँ और ज्यादतर सामने नहीं आती हैं। देखने में अजीब लगती है क्योकि ये आम बतखों की तरह नहीं हैं।इन प्राणियों के सिर का अगला भाग तुंड के रूप का होता है और प्रौढ़ावस्था में दाँत अनुपस्थित रहते हैं। स्तनग्रंथियों में चूचुक नहीं होते।
नारी में न तो गर्भाशय ही होता है और न प्जज्नन द्वार ही। नर में वृषण उदर में ही स्थित रहते हैं तथा शिश्न से केवल शुक्राणु बाहर आते हैं, मूत्र नहीं। पाचन तथा जननतंत्र अलग अलग छिद्रों द्वारा बाहर न खुलकर केवल एक अवस्कर द्वार ही बाहर खुलते हैं। स्तनियों में एक यही ऐसे हैं जिनमें क्रव्यांगक (कैरंकल) तथा अंडदंत (एग टूथ) पाए जाते हैं। जीवाश्मों (फ़ॉसिल्स) की अनुपस्थिति में इनके प्राचीन इतिहास के विषय में ऐसा अनुमान है कि इनका उद्भव संभवत: रक्ताश्म (ट्रायसिक) युग में (या इससे भी पूर्व) हुआ था। ये प्राणी आज आस्ट्रेलिया, तस्मानिया, न्यू गिनी तथा पापुआ में ही शेष रह गए हैं और वहाँ भी संवभत: इसलिए कि एक तो भौगोलिक दृष्टि से इनका निवासस्थल अन्य भूभागों से अलग था और दूसरे इनके जीवनयापन के ढंग में इनका प्रतिस्पर्धी दूसरा स्तनधारी उस भूभाग में नहीं था।
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