बगावत करने वाले जनप्रतिनिधियों के अगला चुनाव लड़ने पर रोक लगे: सिब्बल

बगावत करने वाले जनप्रतिनिधियों के अगला चुनाव लड़ने पर रोक लगे: सिब्बल

कांग्रेस  के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने शनिवार को कहा कि बगावत करने वाले जन प्रतिनिधियों के पांच साल तक कोई सरकारी पद ग्रहण करने और अगला चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की व्यवस्था बननी चाहिए. उन्होंने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की.

सिब्बल की यह टिप्पणी उस वक्त आई है जब राजस्थान  में सचिन पायलट और कई अन्य विधायकों के बागी होने के बाद सियासी उठापठक चल रही है. राजस्थान के राजनीतिक संकट से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘कोई कानून इस बगावत को नहीं रोक सकता. सिर्फ एक ही समाधान है कि अगर कोई बगावत करे तो वह अगले पांच साल तक कोई सरकारी पद नहीं ग्रहण कर सके और अगला चुनाव  भी नहीं लड़ सके.’’

"न्यायाधीश भी इंसान, निजी पसंद न पसंद में पड़ जाते हैं"

कोलेजियम सिस्टम पर सिब्बल ने कहा कि न्यायाधीश भी इंसान होते हैं और ‘‘वे भी निजी पसंद एवं नापसंद में पड़ जाते हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर सरकर को भी शक्ति दे दी जाए तो वो इसका दुरुपयोग करेगी.’’

कांग्रेस नेता ने आस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी और कहा कि उच्चतम न्यायालय को सबरीमला मंदिर के मामले पर विचार नहीं करना चाहिए था.

राजस्थान में पायलट की बगावत के बाद कही यह बात

200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस के पास अब तक 122 विधायकों का समर्थन था, इनमें 107 कांग्रेसी और 15 निर्दलीय विधायक थे. लेकिन सचिन पायलट की बग़ावत से ये गणित बिगड़ गया. बताया गया कि राजस्थान सरकार के दो कैबिनेट मंत्री - विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा दिल्ली में बैठकर सचिन की जीत पर दांव लगा रहे थे. दोनों नेताओं पर कांग्रेस पार्टी ने कार्रवाई की है.

बीते एक सप्ताह में जो टूट हुई है, उसके बाद अशोक गहलोत के पास 102 विधायकों का स्पष्ट समर्थन हो सकता है जिनमें 90 कांग्रेसी, 7 निर्दलीय और 5 छोटी पार्टियों के विधायक शामिल हैं.

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