सावन का महीना 3 दिन बाद शुरू हो जायगा जिसमे भगवान शिव की पूजा करने से दुगुना फल मिलेगा लेकिन पूजा के दौरान बहुत सी सावधानिया भी बरते जिससे आपको भरपूर सफलता के साथ सुख समृद्धि की प्राप्ति हो सके।

सावन के महीने में भगवान शिव का जलाभिषेक करने की बहुत पुरानी मान्यता जुडी हुयी हैं, समुन्द्र मंथन के दौरान शिव ने समुन्द्र का सारा जहर पी लिया इस जल के ताप और असर को कम करने के लिए देवताओ ने जल चढ़ाया तभी से शिव पर कांवड़ चढाने की परम्परा शुरू हुयी।

* इस सावन के महीने में आप अपनी श्रद्धा अनुसार जल, दुग्ध, शहद, गन्ने का रस भगवान शिव को अर्पित कर सकते हैं।

* शिवलिंग के पूर्व दिशा और उत्तर दिशा में बिल्कुल भी नहीं बैठे जबकि पूजा के दौरान पश्चिम दिशा में बैठना अशुभ माना जाता हैं।

* शिवलिंग की पूरी परिक्रमा कभी नहीं करे जबकि इसपर कटे-फटे या गंदे बिल्व पत्र, खराब जल न चढ़ाये आपको बता देवे की पूजा का उचित फल हासिल करने के लिए दक्षिण दिशा में बैठकर पूजा करे।

* जल अर्पित करते समय ऊं नम शिवाय का जप करे जबकि महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी सिद्धि की प्राप्ति करवाता हैं।

सावन के महीने में भगवान शिव का जलाभिषेक करने की बहुत पुरानी मान्यता जुडी हुयी हैं, समुन्द्र मंथन के दौरान शिव ने समुन्द्र का सारा जहर पी लिया इस जल के ताप और असर को कम करने के लिए देवताओ ने जल चढ़ाया तभी से शिव पर कांवड़ चढाने की परम्परा शुरू हुयी।

* इस सावन के महीने में आप अपनी श्रद्धा अनुसार जल, दुग्ध, शहद, गन्ने का रस भगवान शिव को अर्पित कर सकते हैं।

* शिवलिंग के पूर्व दिशा और उत्तर दिशा में बिल्कुल भी नहीं बैठे जबकि पूजा के दौरान पश्चिम दिशा में बैठना अशुभ माना जाता हैं।

* शिवलिंग की पूरी परिक्रमा कभी नहीं करे जबकि इसपर कटे-फटे या गंदे बिल्व पत्र, खराब जल न चढ़ाये आपको बता देवे की पूजा का उचित फल हासिल करने के लिए दक्षिण दिशा में बैठकर पूजा करे।

* जल अर्पित करते समय ऊं नम शिवाय का जप करे जबकि महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी सिद्धि की प्राप्ति करवाता हैं।
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