
जलाल उद्दीन मोहम्मद अकबर तैमूरी वंशावली के मुगल वंश का तीसरा शासक था। अकबर को अकबर-ऐ-आज़म (अर्थात अकबर महान), शहंशाह अकबर, महाबली शहंशाह के नाम से भी जाना जाता है।
अकबर बादशाह की अधूरी प्रेम कहानी के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं, जिन्हें मांडू की रानी रूपमती से प्रेम हो गया था। रानी को पाने के लिए अकबर ने एक साजिश के तहत उन्हें अपने पति से अलग करना चाहा था। मालवा के सारंगपुर जिले में बना एक मकबरा रानी रूपमती के प्रेम और बलिदान की मिसाल है। यह मकबरा मांडू की रानी रूपमती और बाज बहादुर को अलग करने की साजिश रचने वाले शहंशाह अकबर ने खुद बनवाया था।
रानी रूपमती की आवाज और खूबसूरती के कायल अकबर ने रानी को पाने के लिए सुल्तान बाज बहादुर पर न सिर्फ हमला करवाया था, बल्कि उन्हें बंदी भी बना लिया था। इस बात से दुखी रानी रूपमती ने हीरा निगलकर अपनी जान दे दी थी। रानी की मौत से दुखी अकबर ने फौरन बंधक बनाए प्रेमी बाज बहादुर को मुक्त कर दिया। इतना ही नहीं अकबर ने प्रेमिका की समाधि पर जान देने वाले बाज बहादुर का मकबरा भी बनवाया।
सारंगपुर शेरशाह सूरी के सूबेदार सुजात खान के अधिकार में था। सुजात खान का संगीत व कला प्रेमी बेटा बाज बहादुर (1556 से 1561) तक मालवा का सुल्तान रहा। रूपमति सारंगपुर के पास फूलपुर (तिल्लजपुर) के एक किसान की बेटी थी। सुंदर होने के साथ ही रूपमति कवियित्री, गायिका व संगीतज्ञ थी। रूपमति की ख्याति सुनकर सुल्तान बाज उनसे मिलने सारंगपुर आए और उन्हें रूपमति से प्रेम हो गया।
दोनों के प्रेम को लगी शहंशाह की नजर
रानी रूपमती के सौंदर्य व गायन की चर्चा शहंशाह अकबर तक पहुंच चुकी थी। उन्होंने बाज बहादुर को पत्र लिखकर रानी रूपमती को दिल्ली दरबार में भेजने की बात कही।
इस पर तमतमाए बाज बहादुर ने अकबर को उन्हीं के लहजे में पत्र लिखा और अपनी रानी को सारंगपुर भेजने की बात कही। एक राजा की इस गुस्ताखी ने शहंशाह अकबर को विचलित कर दिया।
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