
विकास दुबे कांड को लेकर चर्चा में रही उत्तर प्रदेश के कानपुर की पुलिस एक बार फिर चर्चा में है. इस बार मामला है एक युवक के अपहरण का. युवक के परिजनों का कहना है कि पुलिस के कहने पर उन लोगों ने अपहरणकर्ताओं को फिरौती के 30 लाख रुपये दे दिए. लेकिन अपहरणकर्ता पुलिस के सामने से ही पैसे लेकर निकल गए और पुलिस देखती रह गई.
कानपुर पुलिस के अधिकारी.
कानपुर के बर्रा-5 निवासी एक लैब टेक्नीशियन का 22 जून को अपहरण हो गया था. बदमाशों ने युवक के परिजनों को फोन कर बदमाशों ने 30 लाख रुपये की फिरौती मांगी. युवक के परिजनों का कहना है कि वो समय-समय इस मामले की पूरी जानकारी रिकॉर्डिंग के साथ पुलिस को दे रहे थे.
अगवा युवक के परिजनों का आरोप
परिजनों ने अब आरोप लगाया है कि पुलिस के कहने पर उन्होंने सोमवार देर रात अपहरणकर्ताओं के बताए पते पर गुजैनी हाईवे से झांसी रेलवे लाइन के पास पुल से 30 लाख रुपये से भरा बैग नीचे फेंका. पुलिस वहां से 100 मीटर दूरी से अपहरणकर्ताओं पर नजर बनाए हुए थी. लेकिन वो पुलिस को चकमा देकर रुपयों भरा बैग लेकर भाग निकले और युवक को छोड़ा भी नहीं.
अब फिरौती देने के बाद भी बेटे के न मिलने और पुलिस की नाकामी के बाद परिजनों ने बर्रा पुलिस पर अपहरणकर्ताओं से मिलीभगत का आरोप लगाया है. परिजनों का आरोप है कि अपहरणकर्ता के 29 जून से लगातार फोन कर रहे थे. उन्होंने पुलिस को न केवल जानकारी दी बल्कि हर कॉल की रिकॉर्डिंग तक मुहैया कराई. इतना सब कुछ होने के बावजूद पुलिस बदमाशों का पता नहीं लगा पाई.
पीड़ित परिवार ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के कार्यालय पर मंगलवार को हंगामा किया. इसके बाद एसएसपी ने रात में बर्रा थाने का जायजा लेकर पीड़ित के परिजनों से बातचीत की.
इस परिवार का कहना है कि बेटे को छुड़ाने के लिए उन्होंने अपने जेवर और मकान तक बेच दिया था. अगवा युवक की बहन ने एसएसपी ऑफिस में पत्रकारों से कहा कि घर और खेती बेचने के साथ ही रिश्तेदारों से किसी तरह पैसे उधार लेकर भाई को छुड़ाने के लिए 30 लाख रुपये जमा किए थे.
अगवा युवक की बहन का आरोप है कि जब अपहरणकर्ताओं ने फिरौती की रकम न देने पर भाई को भूल जाने की धमकी दी तो उन्होंने पुलिस को इसकी जानकारी दी. इस पर पुलिस ने परिवार पर विश्वास में लेते हुए अपहरणकर्ताओं को रकम देने को कहा था. पुलिस के कहने पर ही पिता पुलिस के दिए हुए बैग में रुपये लेकर अपहरणकर्ताओं को देने गए
युवक के पिता ने बताया कि फिरौती की रकम देने के लिए पुलिस ने अपना एक बैग और उसमें एक मोबाइल भी रखा था. इससे अपहरणकर्ताओं को ट्रेस किया जा सके. लेकिन अब पुलिस कह रही है कि बैग पुल से फेंकने की वजह से उसमें रखा मोबाइल ऊंचाई से गिरकर टूट गया. इसकी वजह से उन्हें ट्रैक नहीं किया जा सका.
अपहरण पर राजनीति
हिंदी अखबार ‘हिंदुस्तान’ की वेबसाइट के मुताबिक कानपुर के एसएसपी दिनेश कुमार पी ने कहा है कि इस प्रकरण को वो खुद मॉनीटर कर रहे हैं. यदि इस मामले में पुलिसकर्मी दोषी पाए गए तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
इस मामले को उठाते हुए उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने एक ट्वीट में लिखा है, ”यूपी पुलिस का कारनामा. अपहरण करने वालों को पैसे दिलवा दिए और वो पैसे लेकर भाग गए.योगी सरकार जैसी लचर व्यवस्था तो अपराधियों का मनोबल ऊंचा कर रही है.”
इस मामले पर ट्वीट करते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि कानपुर में अपहरण की घटना के बाद बेबस व मजबूर परिजनों द्वारा सूचित करने के बावजूद पुलिस के सामने से फिरौती की रकम ले जाने वालों के ऊपर आखिर किसका हाथ है कि उन्हें पुलिस का भी डर नहीं है. लगता है उप्र की भाजपा सरकार की नैतिकता का ही अपहरण हो गया है.
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