
आज कल महिलाएं अपने बच्चों को प्लास्टिक की बोतल से दूध पिलाने लगी हैं. वर्किंग वुमन हों या हाउस वाइफ सबमें इसका चलन आम हो चला है. दरअसल, प्लास्टिक की इन बोतलों के ज्यादा इस्तेमाल की वजह यह है कि ये आसानी से मिल जाती हैं. साथ ही इनकी कीमत भी कम होती है
और इनके टूटने-फूटने का खतरा नहीं रहता. इंडिया टुडे में प्रकाशित खबर के मुताबिक इन सहूलियतों के बावजूद एक सच्चाई यह भी है कि प्लास्टिक की बोतल से दूध पिलाना आपके बच्चे की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है. आइए जानते हैं कि इन बोतलों से दूध पिलाना खतरनाक क्यों है.
प्लास्टिक की बोतलों में जब गरम दूध डाला जाता है, तो इसमें मौजूद रासायनिक तत्व दूध के साथ मिक्स हो जाते हैं. ऐसे में इन बोतलों से पिलाना सेहत के लिए खतरनाक होता है. इससे बच्चे का इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है.
प्लास्टिक की बोतल अगर आप लंबे समय तक यूज करते हैं और अपने बच्चे को इससे दूध पिलाते हैं, तो इससे बच्चे का वजन घट सकता है. उन्हें पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं और उल्टी, दस्त, बुखार भी हो सकता है.
प्लास्टिक की बोतल में दूध पिलाने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है. इसलिए वे जल्दी-जल्दी बीमार पड़ सकते हैं. इन बोतलों में मौजूद बिस्फेनॉल रसायन बच्चों को दिमागी तौर पर कमजोर बना सकता है.
बच्चों को दूध पिलाने के लिए स्टील की बोतल और कांच की बोतल का इस्तेमाल अच्छा रहता है. इनमें कांच की बोतल ज्यादा बेहतर है. हालांकि इसके जल्दी टूटने का खतरा जरूर रहता है. मगर इन बोतलों में किसी तरह का रसायन नहीं होता. ऐसे में इनमें दूध पिलाना ज्यादा सेफ है, क्योंकि इनमें दूध पिलाने से बच्चे की सेहत प्रभावित नहीं होती. इन बोतलों में दूध को गर्म करके रखा जा सकता है.
इसके अलावा अगर बच्चे को किसी अन्य बोतल से भी दूध पिला रही हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि वह बेहद साफ हो. चिकित्सकों के मुताबिक बच्चों के शरीर में बीमारी फैलाने वाले कीटाणुओं के प्रवेश का सबसे बड़ा जरिया दूध की बोतल बनती है. इसलिए बोतल को अच्छी तरह से धोकर ही पिलाएं.
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