एक गरीब ने जब बुद्ध से पूछा कि मैं इतना गरीब क्यों हूं, तभी बुद्ध ने दिया यह जवाब



गौतम बुद्ध (जन्म 563 ईसा पूर्व – निर्वाण 483 ईसा पूर्व) एक श्रमण थे जिनकी शिक्षाओं पर बौद्ध धर्म का प्रचलन हुआ।

इनका जन्म लुंबिनी में 563 ईसा पूर्व इक्ष्वाकु वंशीय क्षत्रिय शाक्य कुल के राजा शुद्धोधन के घर में हुआ था।
एक समय की बात है। जब भगवान गौतम बुद्ध एक गांव में धर्म सभा को संबोधित कर रहे थे। लोग अपनी अलग-अलग परेशानियों को लेकर उनके पास जाते और उनका हल लेकर खुशी-खुशी वहां से लौट जाते हैं। उसी गांव के सड़क के किनारे एक गरीब व्यक्ति बैठा रहता था। और वह भगवान बुद्ध के उपदेश शिविर में आने जाने वाले लोगों को बड़े ही ध्यान से देखता।

उसे बड़ा आश्चर्य होता कि लोग अंदर तो दुखी चेहरे लेकर जाते हैं। लेकिन जब वापस आते हैं, तो बड़े खुश और प्रसन्न दिखाई देते हैं। उस गरीब को लगा कि क्यों न वह भी अपनी समस्या को भगवान बुद्ध के समक्ष रखें। मन में यह विचार लिए वह महात्मा बुद्ध के पास पहुंचा। उस गरीब ने महात्मा बुद्ध को प्रणाम किया और फिर कहा भगवान इस गांव में लगभग सभी लोग सुखी और समृद्ध है फिर मैं ही क्यों गरीब हूं।

इस पर गौतम बुद्ध मुस्कुराते हुए बोले तुम गरीब और निर्धन अपनी वजह से हो क्योंकि तुमने आज तक किसी को कुछ भी नहीं दिया। इस बात पर वह गरीब व्यक्ति बड़ा आश्चर्य चकित हुआ और बोला भगवान मेरे पास भला दूसरों को देने के लिए क्या होगा। भगवान बुद्ध कुछ देर उसकी बातें सुनते रहे फिर बोले तुम सबसे बड़े अज्ञानी हो।

औरों के साथ बांटने के लिए ईश्वर ने तुम्हें काफी सारी चीजें दी है। मुस्कुराहट दी है जिससे तुम लोगों में आशा का संचार कर सकते हो। मुख दिया है ताकि तुम लोगों को दो मीठे शब्द बोल सको उनकी प्रशंसा कर सको। और दो हाथ दिए हैं। जिससे तुम लोगों की मदद कर सकते हो ईश्वर ने जिसको यह तीन चीज दी हैं। वह कभी गरीब और निर्धन नहीं हो सकता निर्धनता का विचार सिर्फ आदमी के मन में होता है।

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