
बाज़ एक शिकारी पक्षी है जो कि गरुड़ से छोटा होता है। इस प्रजाति में दुनिया भर में कई जातियाँ मौजूद हैं और अलग-अलग नामों से जानी जाती हैं।
वयस्क बाज़ के पंख पतले तथा मुड़े हुए होते हैं जो उसे तेज़ गति से उड़ने और उसी गति से अपनी दिशा बदलने में सहायता करते हैं।
आमतौर पर हम चीते को उसकी तेज रफ्तार से जानते है मगर कई ओर भी पशु-पक्षी है जो अपनी श्रेणियों में स्पीड के लिए पहचाने जाते है | National Geographic Channel द्वारा किये गये अपने रिसर्च के आधार पर 10 सबसे तेज जीव-जन्तुओ की सूची जारी की है जिसमे से हम आपको बाज के बारे में आपको जानकारी देंगे जिसे पेरेग्राइन फाल्कन के नाम से भी जाना जाता है |
बाज पूरी दुनिया में पाए जाते हैं। यह एक विशालकाय पक्षी होता है। यह एक रहस्यमयी पक्षी है। बाज को हर दिन खाना ढूंढनें की जरूरत नही। क्योंकि इनका पाचन तंत्र कुछ खास होता है। जिसमें इनका भोजन संग्रहित रहता हैं। बाज मांसाहारी पक्षी होता है। बाज की गिनती 10 सबसे तेज जीव जंतुओं में होती है। आज हम इस पोस्ट में बाज से जुड़े कुछ रोचक बातों के बारें में चर्चा करेंगे।
बाज से जुड़े कुछ रोचक और महत्वपूर्ण तथ्य:
बाज दुनिया का सबसे तेज उड़नें वाला पक्षी है। इसकी स्पीड 320 किमी प्रति घण्टा होती है।
नर बाज आकर में छोटा और मादा थोड़ा बड़ी होती है।
जंगलों में बाजों का जीवनकाल करीब 17 सालों का होता है।
पूरी दुनिया में बाज की 60 से अधिक प्रजातियाँ पायी जाती है।
बाज अपनें पंजे में 6 किलो तक का वजन लेकर उड़ सकता है।
भोजन न मिलनें की स्थिति में बाज अपना घर बदलते हैं। वरना उन्हें अपना पुराना घर काफी पसंद होता है।
यह एक मांसाहारी पक्षी है। खरगोश,गिलहरी, चूहे,मछली और धीमी रफ्तार से उड़ने वाले पक्षियों, यहां तक की हिरण और लोमड़ी का भी शिकार कर लेता है।
बाज के बच्चों का विकास बहुत तेजी से होता है। इनके बच्चे जन्म के 6 हप्ते बाद ही 3 से 4 किलो के हो जाते हैं।
मादा बाज प्रजनन के दौरान 1 से 3 सफेद रंग के अंडे देती हैं।
बाज की नजर एक समय में दो चीजों पर फोकस कर सकती है। इनकी इनकी गर्दन 270 डिग्री तक घूम सकती है।
बाज पानी के अच्छे तैराक होते हैं। यह एक बार पानी में उतरनें के बाद तबतक नही उड़ सकते जबतक किनारे जमीन पर न आ जाएं।
बाज की उम्र सामान्यतः 20 वर्ष की होती हैं। लेकिन यह 70 साल तक जी सकते हैं।
बाज अपनें शिकार को 5 किमी दूर से ही देख लेते हैं।
द्वितीय विश्व युद्ध में संदेश ले जानें वाले कबूतरों को रोकने के लिए बाजों का इस्तेमाल किया गया था।
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