
बेंगलुरु आधारित बायोकॉन लिमिटेड की आइटोलीजुमैब (Itolizumab) ड्रग को केवल चार केंद्रों पर 30 कोरोना मरीजों हुए क्लीनिकल ट्रायल के बाद आपात स्थिति में इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी गई थी। कंपनी ने इस बात का खुलासा सोमवार को किया।
भारत के औषधि नियंत्रक ने त्वचा रोग के उपचार में काम आने वाले ‘आइटोलीजुमैब’ इंजेक्शन का कोविड-19 के उन मरीजों के उपचार में सीमित इस्तेमाल किए जाने की मंजूरी दी है जिन्हें सांस लेने में मध्यम और गंभीर स्तर की दिक्कत हो। इसे शनिवार को मंजूरी दी गई थी।
कोरोना वायरस के कारण शरीर के अंगों को ऑक्सीजन न मिलने की गंभीर अवस्था के इलाज में आपात स्थिति में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी इंजेक्शन ‘आइटोलीजुमैब’ के सीमित इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है। पिछले कई सालों से त्वचा रोग के इलाज के लिए बायोकॉन कंपनी की यह पहले से स्वीकृत दवा है।
पूरे कोर्स की कीमत करीब 32000 रुपये
कंपनी इसे ALZUMAb के नाम से बेचती है और इसकी कीमत एक छोटी शीशी की कीमत करीब 8000 रुपये है। कंपनी ने खुद ही माना कि ALZUMAb थैरेपी की एक पूरे कोर्स की कीमत करीब 32000 रुपये पड़ेगी क्योंकि चार बार इसे लेने की जरूरत पड़ती है।
कंपनी ने ट्रायल के बारे में बताया कि 30 मरीजों पर इसका परीक्षण हुआ। इसमें 20 मरीजों की हालत में अप्रत्याशित सुधार देखने को मिला और कोई मौत नहीं हुई।
मई में शुरू हुआ था परीक्षण
कंपनी की ओर से जारी डाटा के अनुसार Itolizumab के क्लीनिकल ट्रायल की शुरुआत मई में हुई थी। ये ट्रायल लोक नायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल और दिल्ली के एम्स में किए गए। साथ ही इसका परीक्षण मुंबई के किंग एडवार्ड मेमोरियल (केईएम) और बीवाईएल नायर अस्पताल में भी किया गया। कंपनी का दावा है कि क्लीनिकल ट्रायल में ये साफ हुआ कि दवा से मृत्यु की दर में कमी हुई और साथ ही मरीज के ऑक्सीजन लेवल में भी सुधार हुआ।
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